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Vaidic Pleasure Philosophy - वैदिक आनंद तत्वज्ञान

गुरूकुल मे गुरू शिष्यों को सबसे पहले परिश्रम करना और दैनिक संध्या, यज्ञ, अष्टांग योग, इत्यादी साधना सिखाते थे। उसके पश्चात बालक के परिवार से संबंधीत विद्या और सर्वसाधारण व्यहारीक विद्याए सिखाते थे। इसके बाद शिष्य को उसकी अभिरूची और क्षमता के अनुसार विशेष विद्याए सिखाते थे। इस तरह सत्य सनातन धर्म मे प्रत्येक बालक को वैदिक शिक्षा द्वारा एक उत्तम मनुष्य बनाकर एवं एक उत्तम नागरीक बनाकर संपूर्ण आनंददायी और सुरक्षित समाज और राष्ट्र का निर्माण करने का प्रयास किया जाता है। सत्य सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य जीवन का उद्देश सात्विक आनंद को प्राप्त करना यह है। और मनुष्य को सात्विक आनंद यह प्रकृती पूरक, राष्ट्र पूरक और समाज पूरक कार्य करने से ही प्राप्त होता है एैसा सभी वैदिक साहित्यों मे बताया गया है।

Ayurvedic Intake System - आयुर्वेदिक आहार तंत्र

आयुर्वेद के अनुसार आरोग्य के लक्षण - सम दोष: समाग्निश्च सम धातु मल क्रिया: । प्रसन्नात्मेंद्रियमन: स्वस्थैत्यभियते ।। ।।शुश्रुत ।।

वैदिक धर्म परिचय : भाग 4 - वैदिक धर्म की आरोग्य संबंधी मान्यताए

वैदिक आरोग्य संकल्पना हिंदू धर्म की संपूर्ण अवधारणा किस उद्देश्य से की गई है ? हिंदू धर्म की संपूर्ण अवधारणा यह मनुष्य के आरोग्यदायी और आनंददायी जीवन के उद्देश्य से की गई है । इस कारण हिंदू धर्म के सभी तत्व एवं नियम यह हमारे चिरंतर आरोग्यदायी और आनंददायी जीवन के मूलतत्त्व है। इसिलिए हमे जीवन मे हिंदू धर्म के तत्वों को समझ लेना चाहिए और उनका यथायोग्य पालन करना चाहिए।