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वैदिक धर्म प्रश्नोत्तरी : भाग 3 - वैदिक धार्मिक मान्यताए

सत्य सनातन वैदिक धर्म परिचय प्रश्नोत्तरी - भाग 3 : हिंदू धार्मिक मान्यताए 


                                             वैदिक हिंदू धर्म मे ईश्वर संबंधी मान्यताए - 


प्रश्न : सत्य सनातन वैदिक हिंदू धर्म मे ईश्वर की संकल्पना क्या है ?  

उत्तर : सत्य सनातन वैदिक धर्म में ईश्वर यह एक सच्चिदानंद स्वरूप वैश्विक उर्जा होने की बात कही गई है और ईश्वर का मूल नाम ॐ / ओं / ओ३म् बताया गया है और इसी को विश्व की आदिशक्ती कहा गया है।

 

( विशेष नोट - ३ इस सज्ञा को संस्कृत व्याकरण मे प्लुत कहते और इसका अर्थ तीन मात्राए यह होता है। यानी जिस अक्षर के बाद मे ३ यह सज्ञा लगाई जाती है उसका उच्चारण दिर्घ उच्चारण से भी थोडे जादा समय दिर्घ उच्चारण करना होता है, जैसे की ओ३म् इस शब्द मे ) 


                        ओं खं ब्रह्म । 

                                       यजुर्वेद अध्याय ४०, मन्त्र - १७ ।


ॐ / ओं / ओ३म का अर्थ


दिर्घ अकार से - अखण्ड, पूर्ण, व्यापक, एक, विराट 

उकार से        ऊपर, दूर, वह, अन्य, दूसरा  

मकार से       -   मनुष्य, सृष्टी और प्राज्ञादि  अर्थ लिए जाते है। 


              उपरोक्त अ, उ और म इन विभक्त किये गए तीनो अक्षरों के अनुसार ओ३म् इस शब्द का अर्थ निम्नानुसार होगा …


   “ वह शक्ती जो उपर की ओर है, अखण्ड है, पूर्ण है, सर्व व्यापक है, जो एक ही है, जो विराट उर्जा है, जो हमारे शरीर मे है और जो संपूर्ण सृष्टी मे विराजमान है, एैसी शक्ती ।” 



इन्द्रं मित्रं वरूणमग्निमाहुरथो दिव्यस्स सुपर्णो गरूत्मान् । 

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहु: ।।

                       ऋग्वेद मंडल १ ।सूक्त १६४ । , मन्त्र - ४६ ।

अर्थ : 

इन्द्रं, मित्रं, वरूण, अग्नि, महान रथी, दिव्य, सुपर्णो, गुरू, यम, ईत्यादी सभी विशेषण या नाम उस एक ओंकार स्वरूप वैश्विक आदिशक्ती के लिए विद्वान लोग उपयोग मे लाते है


जैसे की,  ईश्वर का एक नाम गुरू है। 

    जो सत्यधर्म प्रतिपादक, सकल विद्यायुक्त वेदों का उपदेश करता है,  जो सृष्टी की आदि में अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा और ब्रह्मादि गुरूओं का भी गुरू है और जिसका नाश कभी नही होता, एैसे परब्रह्म का नाम गुरू है। 


जैसे की,  ईश्वर का एक नाम है।

पूर्वेषामपि गुरू: कालेनानवच्छेदात् ।

                                       योगशास्त्र - सूत्र १/२६ 


जैसे की,  ईश्वर का एक नाम ब्रह्मा है।

       संपूर्ण जगत् को रच के बढाता है इसलिए ईश्वर का एक नाम ब्रह्मा है। 


ईश्वर के गुण विशेष :  ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र, सृष्टिकर्ता है।


ईश्वर के कार्य मूलक नाम - ब्रह्मा, विष्णू, महेश


ईश्वर के कार्य मूलक ३३ प्रकार ( कोटी ) के नाम / देवता -

पंच महाभूत - 

पंच प्राण -

पंच उप-प्राण -

सप्त स्वर / प्रकाश के सात रंग - 

आठ वसू -

अहंकार -

आत्मा -


ईश्वर के अवतार मूलक नाम - मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण