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Ayurvedic Intake System - आयुर्वेदिक आहार तंत्र

आयुर्वेदिक आहार तंत्र 


आयुर्वेद मे आहार के माध्यम से उर्जा ग्रहण करनेवाले ओर प्राप्त उर्जा को खर्च करनेवाले केंद्र निचे दिए नुसार है …..


  1. आत्मा -

  2. बुध्दी - 

  3. मन - 

  4. ॲाखे - 

  5. कान -

  6. नाक, फुफ्फस -

  7. मुख, कंठ तथा संपूर्ण पाचन तंत्र -

  8. त्वचा - 

  9. प्रजनन तंत्र - 


        शरीर के उपरोक्त सभी नव तंत्र यह शरीर मे उर्जा निर्मिती करने का भी कार्य करते है और प्राप्त उर्जा को खर्च करने का भी कार्य करते है। इसमे जब उर्जा व्यय से जादा उर्जा की निर्मिती अधिक होती है, तब उस स्थिती को शरीर की स्वास्थ्यपूर्ण स्थिती आयुर्वेद मानता है। 

 

आयुर्वेद के अनुसार आरोग्य के लक्षण -


सम दोष: समाग्निश्च  सम धातु मल क्रिया: ।

प्रसन्नात्मेंद्रियमन: स्वस्थैत्यभियते ।।   

                                                 ।।शुश्रुत ।।

सम दोष: यानी हमारे शरीर मे वात, पित्त आणि कफ यह समान होना चाहिए

समाग्निश्च यानी हमारे शरीर मे  जठराग्नि और रस, रक्त, मास, मेद, अस्ती, मज्जा आणि शुक्र या सात धातुओं का पाचक अग्नि समान होना चाहिए

सम धातु यानी हमारे शरीर मे  रस, रक्त, मास, मेद, अस्ती, मज्जा आणि शुक्र हे सात धातु सम प्रमाण मे होने चाहिए

सम मल क्रिया यानी हमारे शरीर से बाहर निकलने वाले मल, मूत्र,पसिना, बाल, नख, आखों मे का किचड, कान मे का मैल यह सब मल योग्य प्रमाण मे बाहेर निकलने चाहिए

प्रसन्नात्मेंद्रियमन: यानी हमारा आत्मा, सब  इंद्रीय आणि मन यह सब प्रसन्न होने चाहिए

           स्वस्थ शरीर के उपरोक्त लक्षण होते है। 

अभी हम शरीर के विभिन्न स्तर के आहार के बारे मे चर्चा करेंगे …


  1. पाचन संस्था के लिए अन्न का आहार


आयुर्वेदिक अन्न गुण तालिका

अन्न पदार्थ और उनके - रस - उष्मा - गुण - त्रिदोष प्रभाव - कार्य 


दूग्ध जन्य पदार्थ -

  1. देसी गाय का दूध : मधूर - शीत - लघु, स्निग्ध, मृदु - वात + पित्त शामक, कफ कारक - समस्त विकारों का शमन करने वाला

  2. देसी गाय के दूध से बना दही :अम्ल, कषाय - उष्ण - स्निग्ध, पातक, - ग्राही, अतिसारहर - मूत्रकृच्छहर, बल वर्धक, शुक्र वर्धक

  3. देसी गाय के दूध के दही से मख्खन : मधूर, कषाय - शीत - स्निग्ध, मृदु - वात + पित्त शामक, कफ वर्धक - अर्शहर, आंत्रगत अवचूषण क्रिया वर्धक

  4. देसी गाय के दूध के दही से बने मख्खन का घी : मधुर - शीत - लघु, स्निग्ध, मृदु, पाचक - त्रिदोषहारी 

तेल

  1. नारियल का तेल : मधूर - शीत - लघु, मृदु - वात + पित्त शामक, कफ वर्धक

  2. मूंगफली का तेल : मधूर - उष्ण - गुरू, मृदु - वात शामक, पित्त वर्धक - बलकारक

  3. सरसो का तेल : कटु - उष्ण - लघु, तीक्ष्ण - वात + कफ शामक, पित्त वर्धक - अग्नि दीपक

  4. तिल का तेल : मधुर, तिक्त, कषाय - उष्ण - गुरू, तिक्ष्ण, पाचक, मृदु, व्यवायी ( शरीर मे तुरन्त फैलनेवाला, बलकारक, पौष्टिक, लेखन, मल को बांधनेवाला, प्रमेह - बहुमूत्रता निवारक,  - वात + कफ शामक, पित्त वर्धक - मेधा हितकर, स्थिरत्व प्रदान करनेवाला, गर्भशोधक, त्वचा हितकर, केश हितकर, शरीर मे हलकापन लानेवाला, योनी रोग निवारक, सरदर्द एवं कानदर्द निवारक, मालिश से बहुत लाभदायक, नस्य,  विशेषता : स्निग्ध होतेहुए कफ नही बढाता और मालिश से पित्त शान्त करता है।

  5. अलसी/ जवस का तेल : मधुर तिक्त - उष्ण - गुरू - त्रिदोष शामक

  6. सुर्यमुखी का तेल : मधुर - शीत - गुरू - वात शामक,  पित्त + कफ वर्धक,

  7. एरंडी का तेल : मधुर, तिक्त - उष्ण - गुरू, तिक्ष्ण - वातशामक, पित्त + कफ वर्धक - आमपातक


मधुर आहार

  1. ईख, गन्ना : मधुर - शीत - गुरू, मृदु, स्निग्ध - वात + पित्त शामक, कफ वर्धक - बलकारक, वीर्यवर्धक, मूत्रकारक


    मसाले

    1. केसर : कटु, तिक्त - शीत ( मधूर ) - वर्णकारक, त्रिदोषशामक, शिरोरोगशामक

    2. इलायची ( छोटी ) : मधुर, कटु - शीत - पातक, ह्रद्य - वात + कफ शामक - श्वास, कास, अर्श तथा मूत्रकृच्छ मे हितकरक

    3. लौंग : कटु, तिक्त - शीत - पाचक, रूचिकर - पित्त + कफ शामक - श्वास, कास, हिक्का मे हितकारक

    4. सौफ : 

    5. खोबरा :

    6. हरा धनिया : मधुर - शीत - पित्तशामक

    7. सुका धनिया : कटु, कषाय - उष्ण - अग्निदीपक, पाचक,रूचिकारक, ग्राही - त्रिदोष शामक - ज्वरनाशक

    8. इलायची ( बडी ) : कटु - उष्ण - लघु, रूक्ष - कफ नाशक, श्वास, तृष्णा मे लाभप्रद

    9. दालचिनी : मधुर, तिक्त - उष्ण - सुगंधित - वात + पित्त शामक - लालास्त्राव जनक, तृष्णा शामक, मुखशोष शामक

    10. जिरा : तिक्त, कटु कषाय- उष्ण - लघु, पाचक - वात + कफ शामक, पित्तोत्तेजक - नेत्रों को हितकर, गुल्म + अतिसार मे हितकर

    11. मेथी ( बीज ) : तिक्त, कटु - उष्ण - स्निग्ध, सुगंधित - वात + कफ शामक, वातानुलोमक - अग्निदीपक

    12. अजवायन : तिक्त, कटु - उष्ण - लघु - वात + कफ शामक, पित्त वर्धक - शूल नाशक, कृमि रोगों मे हितकर

    13. तेजपान : तिक्त, कटु - उष्ण - रूक्ष, स्वादिष्ट - वात + कफ शामक, पित्तकारक - आमदोष, अरूचि तथा प्रतिश्याय मे लाभप्रद

    14. जायफल : तिक्त, कटु - उष्ण - लघु, तीक्ष्ण, रोचक, अग्निदीपक, ग्राही - निंद लाने मे सहाय्यक

    15. जावित्री : कटु - उष्ण - रूचिकारक, वर्णकारक - वात + कफ शामक, पित्तकारक - श्वास, काश तथा कृमि नाशक 

    16. लहसून : कटु, मधूर, तिक्त - स्निग्ध, पाचक, रसायन, गुरू - वात + कफ शामक, पित्तकारक 

    17. अद्रक : कटु - उष्ण - लघु, तीक्ष्ण - वात + कफ शामक, जादा सेवन से पित्तवर्धक -  अग्निदीपक, मल शोधक

    18. हल्दी : तिक्त,कटु, कषाय - उष्ण - पाचक - कफ + पित्त शामक, वर्णकारक - मधुमेह मे हितकर

    अनाज -

    1. जौ : मधुर, कषाय - शीत ( विपाक - कटु ) - लघु, मूत्रल, लेखन, पिच्छल - वात वर्धक, पित्त + कफ शामक

    2. गेहू : मधूर - शीत ( विपाक - मधूर ) - गुरू, स्निग्ध, वात + पित्त शामक, कफ वर्धक - विर्य जनक, रूचिकारक

    3. ज्वारी :

    4. बाजरी :

    5. रागी :

    6. कुटकी / कोदो : 

    7. चावल : मधूर, कषाय - शीत ( विपाक - मधूर ) - मूत्रल, वृष्य, बृहण - पित्त शामक

    8. मका : मधूर - उष्ण ( विपाक - मधूर ) - लघु, शुष्क - वात + पित्त वर्धक, कफ शामक 


    दलहन

    1. अरहर, तुवर : मधुर, कषाय - शीत - ( विपाक - मधुर ) - लघु, ग्राही, वातकारक, पित्त + कफ शामक

    2. मूंग : मधुर, कषाय - शीत - ( विपाक - मधुर ) - लघु, ग्राही, रूक्ष, वातकारक, पित्त + कफ शामक, नेत्रों के लिए हितकर, ज्वरनाशक 


    3. मसूर ( लाल ) : मधुर, कषाय - शीत - ( विपाक - मधुर ) - पाचक, पित्त वर्धक, वात + कफ शामक

    4. चना : कषाय - शीत - ( विपाक - मधुर ) - लघु, रूक्ष, विष्टंभी, वात+ पित्त + कफ शामक

    5. राजमा : कषाय - शीत - ( विपाक - मधुर ) - रूचिकर, स्तन्यकारक, वातकारक, बलकारक

    6. मटर : मधुर - शीत - ( विपाक - मधुर ) - लघु, रूक्ष, मलभेदक, त्रिदोष शामक

    7. मोठ : मधुर - शीत - ( विपाक - मधुर ) - लघु, ग्राही, वातकारक, पित्त + कफ शामक

    8. उडद : मधुर - उष्ण- ( विपाक - मधुर ) - वातकारक, पित्त + कफ वर्धक, बलकारक, शुक्रजनक, सन्तर्पणकारक


    मेवा

    1. काजू : मधुर - उष्ण ( विपाक - मधुर ) - गुरू, स्निग्ध - वात शामक, पित्त + कफ वर्धक - वाजीकर

    2. बादाम : मधुर - उष्ण ( विपाक - मधुर ) - गुरू, स्निग्ध - वात शामक, पित्त + कफ वर्धक - वाजीकर, बलकर,रसायन

    3. अखरोट : मधूर, कषाय - उष्ण ( विपाक - मधुर ) - गुरू, शुष्क - वात शामक, पित्त + कफ वर्धक 

    4. मूंगफली : मधुर, कषाय - उष्ण ( विपाक - मधुर ) - गुरू, स्निग्ध - वात शामक ( कम खानेपर ) , पित्त + कफ वर्धक - 

    5. खारीक

    6. किशमिश :

    7. मनुक्का काला


    फल

    1. सेब : मधूर, कषाय - शीत - गुरू, बृंहण, रूचिकर - शुक्रकारक 

    2. केला : मधूर, कषाय - शीत - गुरू, मृदु - पित्त शामक, कफ वर्धक, अधिक सेवन से विरेचक

    3. नारियल : मधूर, कषाय - शीत - गुरू, स्निग्ध, बृंहण, मृदु - पित्त शामक, 

    4. अंजीर : मधूर, कषाय - शीत - गुरू, पोषक - 

    5. अंगर ( काले ) : मधूर, अम्ल - शीत - मृदुकारी, सरस - पित्त शामक, विरेचक

    6. तरबूज : मधूर - शीत - गुरू, सरस - वात + पित्त शामक, कफ वर्धक

    7. नाशपती : मधुर, कषाय - शीत - लघु, वृष्य - त्रिदोषशामक

    8. अनार : मधुर, अम्ल - शीत - स्निग्ध, पाचक, मृदु  - पाण्डु मे हितकर

    9. संत्रा : मधुर, अम्ल - उष्ण - गुरू, क्षुधा वर्धक - वात शामक, पित्त + कफ वर्धक

    10. खजूर, पेंड खजूर


      सब्जियॅा

      1. पालक : कषाय - शीत, ( विपाक - कटु ) - लघु, पाचक - वातशामक

      2. गाजर : मधुर, तिक्त - शीत ( विपाक - कटु ) - गुरू, अर्शहर - वात + कफ शामक

      3. चकुंदर / बीट : मधुर - उष्ण - ( विपाक - मधुर ) - गुरू, मृदु - वात शामक - पाण्डुहर,

      4. काकडी / खीरा : मघुर, कषाय - शीत ( विपाक - कटु ) - गुरू, रूचिकर, ग्राही - वात + पित्त शामक, कफ वर्धक

      5. फुल कोबी : कषाय - शीत ( विपाक - कटु ) - लघु, शुष्क, खर - वात वर्धक, पित्त + कफ शामक

      6. पत्ता कोबी : मधुर, कषाय - शीत ( विपाक - कटु ) - लघु, शुष्क, खर - वात वर्धक, पित्त + कफ शामक

      7. आलू : मधुर, अम्ल - शीत ( विपाक - मधुर ) - लघु, शुष्क, खर - वात वर्धक, पित्त + कफ शामक

      8. टमाटर : मधुर, अम्ल - शीत ( विपाक - अम्ल ) - लघु, आद्र, त्रिदोषवर्धक

      9. भेंडी : मधुर, कषाय - शीत ( विपाक - कटु ) - खर, पिच्छिल - त्रिदोष साम्य

      10. कच्ची प्याज : कटु - उष्ण - ( विपाक - कटु ) - गुरू, कामोत्तेजक, क्षुधावर्धक - वात + पित्त वर्धक, कफ शामक - बाह्य प्रयोग से ग्रिष्म ऋतु मे होने वाला ज्वर नाशक

      11. अंकुरित पदार्थ : ईषत् कषाय - शीत ( विपाक - मधुर ) - पाचक - पित्त + कफ शामक, जादा सेवन से वात वर्धक


      B. विहार : विचारों का आहार 


      षड रिपु : निर्मिती कारण - रस - उष्मांक  - गुण - त्रिदोष प्रभाव - कार्य 

      मानसिक शक्तीयॅा ( दोष )- 

      1. काम : निर्मिती कारण - इच्छा, लक्ष या संकल्प निश्चिती से उत्पन्न, रस -  प्रारंभ मे उत्साह, दिर्घ काल इच्छा, लक्ष या संकल्प पूर्ती न होने से हताशा, निरूत्साह,  उष्मांक : शरीर उष्मा निर्मिती, गुण -> इच्छा निर्मिती, त्रिदोष प्रभाव -> वात + पित्त वर्धक, कफ शामक, कार्य परिणाम - इच्छित लक्ष पूर्ती से आनंद प्राप्ती, इच्छित लक्ष पूर्ती न होने से दुःख प्राप्ती 

      2. क्रोध : निर्मिती कारण - इच्छा, लक्ष या संकल्प पूर्ती न होने से उत्पन्न, रस -  हताशा, पित्त रस वृध्दी,  उष्मांक : उच्च शरीर उष्मा निर्मिती, गुण -> द्वेश निर्मिती, त्रिदोष प्रभाव -> पित्त वर्धक, वात + कफ शामक, कार्य परिणाम - प्राथमिक स्वरूप मे तात्काल सुरक्षा प्राप्ती, शत्रु निर्मिती,  चापलुस लोग से नजदिकी, चापलुस लोग द्वारा विश्वासघात कृती, शरीर उर्जा क्षय, 

      3. लोभ : कुछ पाने की इच्छा, आसक्ती

      4. मोह : कुछ अतिरिक्त पाने की इच्छा

      5. मद : अपने शक्ती अनावश्यक प्रदर्शन करना, रस - अहंकार मे अनावश्यक वृध्दीवाला रस, 

      6. मत्सर ( द्वेश ) : दुसरो का भला न हो एैसी इच्छा रखना और अगर दुसरे का भला हो जाए तो उससे जलना, रस - हताशा, निरूत्साह, असुरक्षितता बढना, कुंठा बढना,


      अतिरिक्त मानसिक शक्तीयॅा ( दोष )

      1. अहंकार : जीवात्मा के कार्यक्षमताओं पर अवास्त विश्वास करना

      2. ईर्शा : दुसरों से अनावश्यक तुलना करके, अनावश्यक प्रतिस्पर्धा करना

      3. दुसरों से तुलना : उचित मूल्यांकन के लिए और भविष्यकालिन नियोजन के लिए आवश्यक 

      4. भय : भौतिक असुरक्षा का, २. अपमान का 

      5. सम्मानजनक समाज 

      6. उचित शारीरिक, मानसिक, बौध्दीक और आत्मिक शक्ती


      बौध्दीक शक्ती ( दोष ) -

      चतुरस्त्र 


      आत्मज शक्ती ( दोष ) -

      अवधान

      अष्टावधान


      शारीरिक आवश्यकताए ( दोष )

      1. आत्म सम्मान, अहंकार

      2. शुध्द श्वास : उचित उष्णतामान : योग्य हवामान

      3. प्यास : 

      4. भूक :

      5. निद्रा :


        आधुनिक जीवनशौली आवश्यकताए के कारण हो रहे तनाव  ( दोष )

        1. बिजली खर्च

        2. मोबाईल

        3. इंटरनेट 

        4. दूरदर्शन 

        5. लॅापटॅाप, संगणक

        6. हेल्थरेकॅार्डीग वाच

        7. पेट्रोल / डिझल

        8. रसोई गॅस

        9. मिक्सर

        10. फ्रिज

        11. ओवन

        12. ॲल्युमिनिअम / नॅानस्टीक बर्तन

        13. नॅानस्टीक तवा

        14. किटनाशक मिश्रित आहार

        15. शुध्द जल खर्च

        16. शुध्द वायु

        17. उचित उष्णतामान खर्च - पंखा, कुलर, एसी

        18. अनावश्यक औषधी आणि अहितकारक आरोग्य सल्ले

        19. दोषपूर्ण निवास व्यवस्था 

        20. दोषपूर्ण व अन्यायकारक शासन व्यवस्था आणि समाज व्यवस्था 

        21. दोषपूर्ण शिक्षण व्यवस्था 

        22. मैदानी खेळ, मंदीर, मठ तसेच परिश्रम रहित जीवन पध्दती 

        23. खूप दूर- दूरचे अनावश्यक प्रवास


        उपरोक्त जीवनशैलीतील बदलाचे गंभीर परिणाम आपणांस खालील प्रमाणे दिसून येत आहेत….

        1. शारीरिक, मानसिक, बैध्दीक आणि आत्मिक कमजोरी मोठ्या प्रमाणात दिसून येत आहे.

        2. प्रजोत्पदन क्षमता खूप कमी झाली असल्याचे दिसून येत आहे.

        3. नविन जन्माला येत असलेली पिढी अनेक रोगयुक्त असल्याचे दिसून येत आहे.

        4. नविन जन्माला येत असलेल्यां मधे विकलांगतेचे प्रमाण जास्त असल्याचे दिसून येत आहे.

        5. आर्थीक ताण खूप वाढला असल्याचे दिसून येत आहे.


        संयत भोगी, संन्यासी, योगी, त्यागी, देव, राम, साधू, सुर, साधक, 

                                    विरूध्द 

        अतिभोगी, उपभोगी, समभोगी ( संभोगी ), लोभी, लंपट, नशेडी, अन्यायी, अत्याचारी, असुर, दानव, दस्यु, डाकू, डाकिन, राक्षस, रावण



        तांबूल रेसिपी

        1. खानेका पान - 

        2. चुना - 

        3. कथ्था - 

        4. सोफ - 

        5. खोबरा - मधूर, कषाय - शीत - गुरू, स्निग्ध, बृंहण, मृदु - पित्त शामक, 

        6. जावित्री - कटु - उष्ण - रूचिकारक, वर्णकारक - वात + कफ शामक, पित्तकारक - श्वास, काश तथा कृमि नाशक 

        7. सुपारी ( गिली, सुकी ), - चिकनी, बर्डा, सफेद

        8. बादाम - मधुर - उष्ण ( विपाक - मधुर ) - गुरू, स्निग्ध - वात शामक, पित्त + कफ वर्धक - वाजीकर, बलकर, रसायन

        9. गुलकंद -

        10. बेल कॅन्डी - 

        11. आवला कॅन्डी

        12. लवंग : कटु, तिक्त - शीत - पाचक, रूचिकर - पित्त + कफ शामक - श्वास, कास, हिक्का मे हितकारक

        13. ईलायची ( छोटी ) : मधुर, कटु - शीत - पातक, ह्रद्य - वात + कफ शामक - श्वास, कास, अर्श तथा मूत्रकृच्छ मे हितकरक

        14. चेरी

        15. पुदिना ( आसमांतारा )

        16. हरे बारीक पत्ते

        17. दालचिनी : मधुर, तिक्त - उष्ण - सुगंधित - वात + पित्त शामक - लालास्त्राव जनक, तृष्णा शामक, मुखशोष शामक