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Vaidic Sciences Part 8 : Horoscopy - वैदिक ज्योतिष्य विज्ञान

वैदिक धर्म प्रश्नोत्तरी - भाग 8                 

                        वैदिक ज्योतिष्य विज्ञान संबंधी प्राथमिक जानकारी  


सत्य सानातन वैदिक धर्म के वेदों मे विश्व की उत्पत्ती संबंधी निम्न मंत्रो मे स्पष्ट जानकारी देकर कहा गया है की इस सृष्टी मे हमारी पृथ्वी, सूर्य और चंद्र इत्यादी की निर्मिती और प्रलय प्रत्येक कल्प मे होते रहता है। 


ओ३म् ऋतंच सत्यंचा भिध्दा तपसो अध्यजायत।

ततो रात्र जायत ततो समुद्र अर्णवह ।।


ओ३म् समुद्रा दर्णवादधी संवत्सरो अजायत। 

अहोरात्राणी विदध द्विस्मस्य मिशतो वशी ।।


ओ३म् सूर्या चंद्र मसौ धाता यथा पूर्व मकल्पयत।

दिवंच् पृथ्वीचांतरिक्ष मथो स्वह ।।   ऋग्वेद 


इसी तरह पृथ्वी, सूर्य, चंद्र और हमारे सौर मंडल के अन्य ग्रहों के संबंध मे आवश्यक जानकारी देकर उनकी गती और उनके गुरूत्व प्रभाव का हमारे मनुष्य जीवन पर किस तरह पडता है और इन बलों का हमने हमारे लाभ के लिए किस तरह से उपयोग करके लेना चाहिए इस संबंध मे वैदिक ज्योतिष्य शास्त्र मे बताया गया है। क्योकी इन ग्रह - तारों के गुरूत्व का हमारे कार्यशक्ती पर बहुत प्रभाव पडता है इस कारण प्रत्येक मनुष्य ने इस ज्योतिष्य शास्त्र का महत्व समझकर उसका अपने जीवन मे यशस्वी होने के लाभ उठाना चाहिए और इसके लिए आवश्यक अध्ययन अवश्य करना चाहिए।


ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार हमारे निकटवर्ती महत्वपूर्ण  ग्रह तारों के संबंधी महत्व पूर्ण जानकारीया ……


प्रश्न : सत्य सनातन वैदिक  ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार पृथ्वी का सूर्य की एक प्रदक्षिणा करने का पथ कितने किलो मिटर का है और उसे पृथ्वी कीस गती से और कितने दिनो मे पूरा करती है ? 


उत्तर : पृथ्वी का सूर्य को प्रदक्षिणा करने कामार्ग 94.20 कोटी किलो मिटर का है।  और उसे पूरा करने के लिए पृथ्वी को 30 किलो मिटर प्रति सेकंद ( 1.07 लाख कि. मी. प्रती तास ) की गती से 365.25 दिन लगते है। इसे ही एक सौर वर्ष कहते है।


प्रश्न : सूर्य से पृथ्वी का अंतर कितना है

( पृथ्वी के सूर्य को चक्कर लगाने के परीघ की त्रिज्जा radius कितने किलो मिटर की है ? )

उत्तर : सूर्य से पृथ्वी का अंतर 14.8 करोड कि.मि. से 15 कि.मि. है।


प्रश्न :  आधूनिक अवकाश विज्ञान मे ग्रहों के बिच का अंतर गिनने का एकक क्या है ? 

उत्तर : आधूनिक अवकाश विज्ञान मे ग्रहों के बिच का अंतर गिनने का एकक ॲस्ट्रोनॅाटीकल यूनिट है, जिसे  AU - Astronomical Unit कहते है। यह अंतर  14.9 करोड कि.मि. है जो पृथ्वी से सूर्य के अंतर का मध्य है। 


प्रश्न : हमारे सौर मंडल के सभी ग्रह किस दिशा मे घुमते है ? 

उत्तर : हमारे सौर मंडल के सभी ग्रह पश्चिम से पूरब की ओर ( Anti-clockwise ) घुमते है।


प्रश्न : पृथ्वी का परीघ ( Circumference ) कितने किलो मिटर का है ?

उत्तर : पृथ्वी का परीघ ( Circumference )  40,075 कि. मि. का है।


प्रश्न : पृथ्वी को खुद का एक चक्कर लगाने के लिए कितना समय लगता है और पृथ्वी यह चक्कर किस गती से लगाती है ? 


उत्तर : पृथ्वी को खुद का एक चक्कर लगाने के लिए 23 घंटे, 56 मिनीट और 4.09053 सेकंद इतना समय लगता है और पृथ्वी यह चक्कर  460 मिटर प्रति सेकंद इस गती से लगाती है। (1670 km/ h at equator.)


प्रश्न : क्या पृथ्वी की सूर्य के सभोवताल घूमने की परिभ्रमण गती समान होती है

उत्तर : नही, पृथ्वी की परिभ्रमण गती समान नही होती है, जब जनवरी माह मे पृथ्वी सुर्य के नजदीक होती है तब परिभ्रमण गती कम होती है और जब जून माह मे पृथ्वी सुर्य से दूर होती है तब जादा होती है। 


प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार चंद्र को पृथ्वी की एक प्रदक्षिणा करने के लिए कितना समय लगता है ? 

उत्तर : चंद्र को पृथ्वी की एक प्रदक्षिणा करने के लिए 29.5 दिन लगते है। इस समय को एक चंद्र माह कहा जाता है। ( एक पौर्णिमा से दूसरे पौर्णिमा तक का समय ) वास्तव मे चंद्र को पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने के लिए 27.322 दिन लगते है और उतनाही समय स्वयं के परिवलन को भी लगता है। इस कारण ही चंद्र का केवल एक ही भाग हमे पृथ्वी से हरदम दिखाई देता है। चंद्र को पृथ्वी की प्रदक्षिणा पूरी करने के लिए जो 2.178 दिन का अतिरिक्त समय लगता है वह पृथ्वी द्वारा सूर्य की प्रदक्षिणा मे जो अतिरिक्त अंतर काटा जाता है, उस कारण लगता है। 


प्रश्न : एक चंद्र वर्ष के कितने दिन होते है ? 

उत्तर : एक चंद्र वर्ष के दिन (29.5 दिवस x 12 महिने)  354 दिवस


प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र मे काल गणना सौर वर्ष के अनुसार की जाती है या चंद्र वर्ष के अनुसार की जाती है

उत्तर :  ज्योतिष्य शास्त्र मे काल गणना यह,  चंद्र वर्ष और सौर वर्ष दोनो के अनुसार की जाती है। सर्व प्रथम काल गणना यह चंद्र वर्ष के अनुसार की जाती है और इस काल गणना मे प्रत्येक सौर वर्ष की तुलना मे ११ दिन कम होते है। और प्रत्येक सौर वर्ष मे कम गिरते ११ दिनों की पूर्ती करने के लिए हर तीन वर्ष के बाद चंद्र वर्ष मे एक चंद्र मास “अधिक मास” कह कर जोड दिया जाता है। 


प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार ग्रह किसे माना जाता है ?

उत्तर : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार ग्रह उसे माना जाता है जो खगोलीय पिंड को मनुष्य के व्यवहार पर गुरूत्व प्रभाव डालते है। इस कारण ज्योतिष्य शास्त्र मे सूर्य को और चंद्र को भी एक ग्रह माना जाता है। 


प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार नव ग्रह कौनसे है ?

उत्तर : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार नव ग्रह निम्ना नुसार है…..


  1. सूर्य 

  2. बुध

  3. शुक्र

  4. पृथ्वी, चंद्र ( पृथ्वी का उपग्रह )

  5. मंगल

  6. गुरू

  7. शनि

  8. राहू 

  9. केतु


प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार राशी क्या होती है ? 

उत्तर : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार एकूण 12 राशीया ( Horoscope  ) होतीहै। पृथ्वी द्वारा सूर्य की प्रदक्षिणा करने के अंडाकार मार्ग को 360 अंशो मे ( भागो मे )  विभाजित कर,  उसे 12 भागो मे विभाजित किया जाता है। इन 12 भागो को 12 राशी कहा गया है। 360/12 = 30 अंश ( भाग ) यानी एक राशी 30 अंश की होती है।


     पृथ्वी के सूर्य प्रदक्षिणा के  इन 12 भागो मे रात्री के समय आकाश मे दिखाई देनेवाले प्रमुख तारों द्वारा जो आकृती बनती है,  उस आधार पर इन 12 भागों को 12 राशी के नाम दिए गए है । 


प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार नक्षत्र और चरण क्या होता है


नक्षत्र :- पृथ्वी द्वारा सूर्य की प्रदक्षिणा करने के अंडाकार मार्ग को 360 अंशो मे ( भागो मे )  विभाजित कर,  उसे 27 भागो मे विभाजित किया जाता है। इन 27 भागो को 27 नक्षत्र कहा गया है।

360/27 = 13.33 अंश ( भाग ) = 13 अंश 20 कला ( मिनीट )


चरण :- पृथ्वी द्वारा सूर्य की प्रदक्षिणा करने के अंडाकार मार्ग को 360 अंशो मे ( भागो मे )  विभाजित कर,  उसे 108 भागो मे विभाजित किया जाता है। इन 108 भागो को 108 चरण कहा गया है।

360/108 = 3.33 अंश ( भाग ) = 3 अंश आणि 20 कला ( मिनीट )



प्रश्न :  ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार बारा राशीयों का नाम बताईए

उत्तर :  ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार बारा राशियों के नाम निम्ना नुसार है…..

१. मेष, २. वृषभ, ३. मिथुन, ४. कर्क, ५. सिंह, ६. कन्या, ७. तुला, ८. वृश्चिक, ९. धनू, १०. मकर, ११. कुंभ, १२. मीन



प्रश्न : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार भारतीय माह, उनका अंग्रेजी माह के अनुसार उनका कालावधी और उनकी राशीया बताईए

उत्तर : ज्योतिष्य शास्त्र के अनुसार भारतीय माह, उनका अंग्रेजी माह के अनुसार उनका कालावधी और उनकी राशीया निम्ना नुसार है


  1. चैत्र - राशी : मेष 

२५ मार्च से ३० अप्रेल के दरम्यान प्रारंभ 

  1. वैशाख -  राशी : वृषभ 

२४ अप्रैल से ५ मई के दरम्यान प्रारंभ 

  1. जेष्ठ -  राशी : मिथुन

२३ मई से ५ जून दरम्यान प्रारंभ 

२१ जून सबसे बडा दिन - आंतर राष्ट्रीय योग दिन 

- नक्षत्र : मृग (७ जून को प्रारंभ),

  1. आषाढ -  राशी : कर्क

२२ जून से ५ जुलै दरम्यान प्रारंभ 

  1. श्रावण -  राशी : सिंह

२१ जुलै से ५ ॲागस्ट के दरम्यान प्रारंभ 

  1. भाद्रपद -  राशी : कन्या

१९ ॲागस्ट से १० सप्टेंबर के दरम्यान प्रारंभ 

  1. अश्विन -  राशी : तुला

१८ सप्टेंबर से १० नोव्हेंबर के दरम्यान प्रारंभ 

  1. कार्तिक -  राशी : वृश्चिक

१६ नोव्हेंबर से १२ डिसेंबर के दरम्यान प्रारंभ 

  1. मार्गशीर्ष -  राशी : धनू

१५ डिसेंबर से १२ जानेवारी के दरम्यान प्रारंभ 

  1. पौष -   राशी : मकर

१४ जनवरी से १२ फेब्रुवारी के दरम्यान प्रारंभ 

  1. माघ -   राशी : कुंभ

१२ फेब्रुवारी से ५ मार्च के दरम्यान प्रारंभ 

  1. फाल्गुन -  राशी : मीन

५ मार्च से १५ मार्च दरम्यान के दरम्यान प्रारंभ 


प्रश्न : पृथ्वी के सूर्य प्रदक्षिणा संबंधी भारतीय माह दर्शक, राशी दर्शक मानचित्र बनाईए ।

उत्तर : पृथ्वी के सूर्य प्रदक्षिणा संबंधी भारतीय माह दर्शक, राशी दर्शक मानचित्र निम्ना नुसार है…..


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