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वैदिक धर्म परिचय प्रश्नोत्तरी - भाग 5 : संस्कृत भाषा

सत्य सनातन वैदिक धर्म परिचय प्रश्नोत्तरी - भाग 5 : संस्कृत भाषा


प्रश्न : सत्य सनातन वैदिक धर्म की मूल भाषा कौनसी है ? 

उत्तर : सत्य सनातन वैदिक धर्म की मूल भाषा संस्कृत है।


प्रश्न : संस्कृत भाषा की खास विशेषताए कौनसी है ?

उत्तर : संस्कृत भाषा की खास विशेषताए निम्ना नुसार है ……..

  1. संस्कृत यह एक संपूर्णत: शास्त्रोक्त भाषा है।

  2. संस्कृत यह ब्रह्मांड की भाषा है ।

  3. संस्कृत यह एक नैसर्गिक भाषा है।

  4. संस्कृत एक सनातन एवं पूरातन भाषा है ।

  5. संस्कृत यह स्वरमय एवं संगीतमय भाषा है।

  6. संस्कृत भाषा मे भाव, उच्चारण एवं भौतिक प्रकटीकरण एकजैसा एवं संपूर्ण होता है।

  7. संस्कृत भाषा को सही उच्चारण के साथ बोलने के लिए आपके सातो चक्रों का उपयोग होता है, इसलिए आपके सातों ऊर्जा चक्र जागृत होने मे और संतुलित होने में मदत मिलती है और चैतन्य ऊर्जा का प्रवाह आपके सहस्त्रार चक्र की ओर अग्रेसर होने में मदत मिलती है, इस कारण आपको परम् आनंद की अनुभूति होती है। 

  8. संस्कृत यह इंडो- युरोपीयन प्रकार मे आने वाली भाषा है।

  9. युरोपीयन देश - जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, पोर्तुगाल, इटली, ईत्यादी ५६ देशों के भाषा का मूल आधार संस्कृत है।


              अंग्रेजी.               जर्मन.              संस्कृत. 

  1. One ओन -     eins एयानस्    -    एक:, एकम्

  2. Two टू.   -      swain स्वाईन  -    द्वी, द्वितीय 

  3. Three.   -      drin द्राईन.      -    त्री, तृतीय

  4. Four - चत्वार, चतुर्थ, चतुर्थी, चतुर्थकं, चतुर्थम्

  5. Five - पंच, पंचम्, पंचमी, पंचकं, 

  6. Six - शष्ठी, शटकं, 

  7. Seven - सप्तं, सप्तमी, सप्तकं

  8. Eight - अष्टम, अष्टमी, अष्टकं

  9. Nine - नवं, नवमी, नवकं

  10. Ten - दहं, दशमी, 

  11. Eleven - एकादश, एकादशं, एकादशी, 

  12. Twelve - द्वादश, द्वादशं, द्वादशी

  13. Thirteen - त्रयोदश, त्रयोदशं, त्रयोदशी

  14. Fourteen - चतुर्दश, चतुर्दशं, चतुर्दशी

  15. Fifteen - पंचदश, पंचदशं, पंचदशी

  16. Mother  -             मादर ?     -      मातृ, माता

  17. Brother -              ब्रादर ?    -      भातृ, भ्राता

  18. Go -                                          गमन, गोचर,

  19. Man : मॅन - मनुष्य, मानव, मन अस्यती मानव, 

  20. Manual : मॅन्यूअल : संहिता, मनु ( प्रथम राजा ) द्वारा निर्मिती नियमावली - मनुस्मृती


    1. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 25 हजार लोगों की मातृभाषा संस्कृत है।

    2. कर्नाटक के सिमोगा जिल्हे का  मत्तुर यह  गाव पूर्णत: संस्कृत बोलता है।

    3. संसार मे ७ हजार भाषाए बोली जाती है। 

    4. संस्कृत भाषा और उसके वर्ण / उच्चारण यह हमारे सभी भाव स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की क्षमता रखने वाले है । 

    5. संस्कृत भाषा के उच्चारण हमे क्लिष्ट लगते है परंतु वे हमारे उच्चारण करने की संपूर्ण क्षमता का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद बने है। यही कारण है की संस्कृत भाषा के प्रयोग से हमारे मुख की उच्चारण क्षमता का पुरेपूर उपयोग होता है और हमारे स्वर यंत्र की संपूर्ण उच्चारण क्षमता का व्यायाम होता है और इससे विशेष ध्वनि लहरे निर्माण होकर विशेष आनंद एवं ऊर्जा का अहसास होता है।

                


    प्रश्न : संस्कृत भाषा की लिपी को क्या कहते है ? 


    उत्तर : संस्कृत भाषा की लिपि को देवनागरी लिपि कहलाती है।


    प्रश्न : संस्कृत भाषा मे कितने वर्णाक्षर होते है ? 


    उत्तर : संस्कृत भाषा मे 54 वर्णाक्षर होते है। 

    अष्टाध्यायी के अनुसार कुछ जोडाक्षर पकड के  63  उच्चारण / वर्णाक्षर बताए गए है। 


    प्रश्न : अन्य प्रमुख भाषाओं के वर्णाक्षरों की संख्या बताईए ….

    उत्तर : अन्य प्रमुख भाषाओं के वर्णाक्षरों की संख्या निम्ना नुसार है  …


    1. चिनी मे 204, ( चिनी भाषा मे २०४ उच्चारण है परंतु यह सब थोडे उच्चारण का ही अशास्त्रीय विस्तार है। )

    2. रूसी मे  35, 

    3. फारसी मे 31, 

    4. तुर्की और अरबी मे 28, 

    5. स्पेनिश मे 27, 

    6. अंग्रेजी मे 26, 

    7. लॅटीन और हिब्रू मे 20 और 

    8. बाल्टिक मे 17 वर्णाक्षर / उच्चारण है।  


      प्रश्न : संस्कृत भाषा की संपूर्ण वर्णमाला बताईए …..

      उत्तर : संस्कृत भाषा की वर्णमाला मे एकूण 54 वर्णाक्षर है। इस मे 16  स्वर ( स्वतंत्र ध्वनी ) और 34 व्यंजन ( अ से समाप्त होने वाले हलंत ध्वनी ) और 4 जोडाक्षर है।


      स्वर - 16 - यह स्वतंत्र ध्वनी अक्षर होते है।

      प्रमुख स्वर - अ, इ, ए 

      • अ,आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ऋृ लृ, लृृ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अ:

      व्यजन - 34 - यह हलंत ( यानी अ से समाप्त होनेवाले ) अक्षर होते है।

            -     कंठव्य     - क वर्ग - क्, ख्, ग्, घ, ड्.

      • जिव्हास्थ  - च वर्ग - च्, छ्, ज्, झ् य्.

      • तालव्य     - ट वर्ग - ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्.

      • दंतव्य      - त वर्ग - त्, थ्, द्, ध्, न्. 

      • ओष्ठ.     - प वर्ग - प्, फ्, ब्, भ्, म्. ( पवन अक्षर )

      • अंतस्थ:             - य्, र्, ल्, व्, 

      • उष्मण:              - श्, ष्, स्, ह्,  ळ, 

      जोडाक्षर - 4                   - क्ष, ज्ञ, त्र, श्र


      एक स्वर को १८ प्रकार से बोला जा सकता है । ?


      अक्षर विज्ञान - स्वर विज्ञान - ध्वनी विज्ञान - शब्द विज्ञान


      स्वर : स - सचिदानंद, सृष्टी, व - व्यक्त करना, र - रमणमान आवाज शक्ती

              सचिदानंद सृष्टी को स्वतंत्र व्यक्त करने वाली ध्वनी 

      व्यंजन : व्य - व्यक्त, न - नही, अंजन - अ के शिवा

                 अ के शिवा व्यक्त नही हो सकते एैसे ध्वनी


      अक्षर - 

      अ - नही,  क्षर - नष्ट होना,

      = जो नाश नही होता वह अक्षर, 

      = वायू मे विभिन्न लहरीयों के कंपनों का निर्माण करके ध्वनी उत्पन्न होता है और उस ध्वनी लहरी का कंपन समाप्त होने के साथ ही ध्वनी अपनी निरव शांतता के रूप मे स्थित हो जाता है। 


                    ॥ संस्कृत भाषा एक मोक्षदायीनी भाषा ॥


      संस्कृत यह एक भक्ती संगीतमय भाषा है, जिसके बोलने से हमे श्रेष्ठ आध्यात्मिक उर्जा प्राप्त होती है। 

      संस्कृत के प्रत्येक अक्षर का अर्थ तीन संदर्भों मे होता है,

      १.. भौतिक भाव अर्थ, 

      २. नैसर्गिक भाव अर्थ, 

      ३. आध्यात्मिक भाव अर्थ। 

      परंतु इसके लिए प्रत्येक अक्षर का निश्चित एैसा स्पष्ट उच्चारण यानी की उचित स्वर मे उच्चारण करना बहुत आवश्यक है। 

      इस प्रकार अक्षर के निश्चित स्वर मे उच्चारण करने से ध्वनी उर्जा निर्माण होती है, जो आपके भावों को आगे आकाश मे प्रवाहित और प्रसारित करती है। 

      उचित स्वर के उच्चारण के लिए आपके कंठ को उचित मात्रा मे परिष्कृत करना जरूरी होता है, इसे ही स्वर साधना कहते है। 

      जब आप इन स्वरों को यानी अक्षरों को निश्चित लय और ताल मे बध्द करते है तब वह गीत बन जाते है और जब इन गीतों को विभिन्न वाद्यों के स्वरों के साथ बध्द करते हो तब वह संगीत बन जाता है और जब इस संगीत को सचिदानंद की सूक्ष्म आनंद ध्वनी से बध्द करते हो तब यह ईश्वर की भक्ती बन जाता है और यह भक्ती संगीत आपको समक्ष ईश्वरी आनंद शक्ती को प्राप्त करा कर मोक्ष आनंद को प्राप्त कराता है।


                 संस्कृत भाषा को लिखीत रूप मे प्रकट करने का आधार देवनागरी भाषा मे लिखे गए वर्णाक्षर है। प्रत्येक वर्णाक्षर  मनुष्य शरीर मे स्थित मुख और कंठ के विशिष्ट भागों के प्रयोग द्वारा निर्मित कंपन से और प्राणशक्ती के द्वारा वायू की मदत से उत्पन्न होता है । यह प्रत्येक वर्णाक्षर एक निश्चित नैसर्गिक उर्जा को या संकेत को दर्शाता है। इस कारण संस्कृत भाषा के हर एक वर्णाक्षर को अपने आप मे एक स्वतंत्र अर्थ है। यह अर्थ समझने का हम अगर प्रयत्न करे तो हमे सभी भारतीय भाषा को समझने मे आसानी हो जाती है। 

      इन वर्णाक्षरों के अर्थ को कुछ हद तक हम एक खेल के माध्यम से समझ सकते है।  इस के लिए आपको यह करना है की आप किसी एक निश्चित वर्णाक्षर  से बननेवाले जादा से जादा शब्दों को लिखीए और वह सब शब्द किस तरह के भाव को प्रकट करते है उस आधार पर आप को उस वर्णाक्षर  का अर्थ समझने मे मदत होगी।


      अक्षर विज्ञान  -  स्वर - 16 -          

                                                स्वर अक्षर ...  अ A

      ऱ्हस्व अ - अभाव, नही, शून्य, अशुध्द, अयोग्य, नेति-नेति, ( विरूध्द अर्थ परिवर्तक )

      ऱ्हस्व अ से बननेवाले शब्द - अभाव, अपूर्ण, शून्य, अभय, अहिंसा, अमर, अमृत, अक्षर, अहंकार, अनादि - अनुपम, अनंत, अष्टम,

      A ऱ्हस्व - Adam, am, an, any,

      दिर्घ अ - एक, अखण्ड, सब, समस्त, पूर्ण, पूर्णत्व, व्यापकता, 

      दिर्घ अ से बननेवाले शब्द - ओ३म्, अवनी, अंबर, आकाश, अल्लाह, आमेन, अदिती, अभी, अग्नी

      A दिर्घ - all, a (एक), first, 

                                                स्वर अक्षर ….  आ  O 

      आ - आना, बाह्य तत्व, आनंद उर्जा, प्रश्न वाचक मुद्रा, आकाश, खाली जगह, भरपूर मात्रा

      आ से बननेवाले शब्द  - आना, आधार, आवाज, आयाम, आम, आकांत, आकांशा

      आनंद = आ - आकाश + आनंद उर्जा, नं - न + न - है, द - देह

             = देह मे स्थित उर्जा है

      आत्मा : आनंद उर्जा,  त् - तल, म - मन  = तल मन मे आनंद उर्जा है वह आत्मा । 

      A ( ॲा ) - away, auspices, awesome,

      O ( ॲा ) - Out, Omnipresent 

                                              स्वर अक्षर ….  इ, ई -  E


      अकार के बाद उसके नजदीक ही  ‘ इ ’ का उच्चारण होता है।

      ऱ्हस्व इ - नजदिक

      ऱ्हस्व इ से बननेवाले शब्द - इदम्, इहलोक, इधर, यहा

      E - Earth - इहलोक, Ether  

      दिर्घ ई - गति, वाला 

      गती अर्थ से बननेवाले शब्द -

      ईश्वर, ईशान्य, ईशान, इंन्द्र, इंधन ( गति देने वाला धन ), इंन्सान, ईलेक्टीक, 


      वाला अर्थ से बननेवाले शब्द - 

      १. जैसे प का अर्थ रक्षा करना है, इसलिए पि का अर्थ रक्षा करने वाला यह होता है, पितृ

      २. जैसे वा का अर्थ गति है ( वाहन ), किंन्तु व मे इ लगाने से वि का अर्थ गति वाला होता है।( विमान ), विचरण,विकास, 


      शब्द में जब इ की छोटी वेलांटी लगती है, या ई की बडी वेलांटी लगती है तो यह उस मूल अक्षर के गुणों को और ‘ गतिमान ’ या ‘वाला’ इस अर्थ में लेना चाहिए।


      स्वर अक्षर … उ,  ऊ,  -  U

      उ - ऊपर, दूर, वह, अन्य, दूसरा, तथा और आदि, ऊर्जा

      उ से बननेवाले शब्द - ऊपर, उसे, उत्साह, उर्व, ऊर्जा, उंबर



                                           स्वर अक्षर ...  ए, ऐ -  A


      ए यह अक्षर अ और इ के संयोग से बना है ।

      अ से नही और इ से गति इसलिए ए का अर्थ गतिहीन, निश्चल अथवा पूर्ण यह होता है। इसी से एक यह प्रख्यात शब्द बनता है, जो पूर्णता, अखण्डता का द्योतक है।


      ए  अक्षर का अर्थ …. पूर्ण, अव्यय, गतिहीन, निश्चल, 

      ए  से बननेवाले  शब्द - एक, एवं, एकूण, एकाग्रता, एरंड, ऐवज, ऐसा, ऐरण


                                         स्वर अक्षर - ओ, औ  - O

      ओ - वह ( संबोधन ),  वही, दूसरा नही, अन्य नही, एकही, परम आकाशिय उर्जा

      ओ से बननेवाले शब्द - ओ३म्, ओहंम्, ओज, ओंकार, ओजस, ओनम


                                         स्वर अक्षर - ऋ, ऋृ - rhi

      ऋ - सत्य,  अखंड गति, बाहर

      ऋ से बननेवाले शब्द - ऋषी, ऋचा, ऋण, ऋषभ, ऋतु, 


                                         स्वर अक्षर - लृ, लृृ - Lri

      लृ - सत्य, गति, भितर, पृथ्वी तत्व, 


                                             स्वर अक्षर - अं 

      अं / दिर्घ म - नही, अभाव, शून्य

      अं से बननेवाले शब्द - अंबर, अंग, अंगद, अंगुठी, अंगिरा, अंशुमान, 


                                            स्वर अक्षर - अ: 

      अ: / दिर्घ हा - निश्चय दर्शक, आनंद दर्शक 


      अं, अ: यह अजन्त भी कहलाते है । 


      व्यंजन : 38        कंठव्य - क वर्ग व्यंजन 


                            व्यंजन अक्षर - क् - k, c, q

      क् - कठोर, प्रश्न वाचक, बांधना, बलवान, बडा, प्रभावशाली, सुख

      क् से बननेवाले शब्द - कठोर, कठिण, कष्ट, कमर, कोठ्यार, कुठार, कुमार, कांचन, कुणाल, कुबेर, कुकूर, कौन, कब, कहा, कैसे, क्रिडा, कुंजन, क्रौंच, काठी, कमल, कोमल, कौमार्य, कौडी, कृषी, कृष्ण, काला, काल, काम, क्रोध, कण, कणाद, कंस, कंठ, कुंभ, कुंभार, कांस्य,,   

      क् से बननेवाले अंग्रेजी शब्द - king, Country, Question

       

                                   व्यजन अक्षर - ख् 

      ख् - आकाश, पोल, खुला, छिद्र

      ख् से बननेवाले शब्द - खं ( आकाश ), खाली, खोल, खग: ( पक्षी ), खंबीर, खंदा, खंजीर, खजूर, खाट, खट्टा, खटाटोप, खटपट, खासी, खास, खोटी, खोटा, खारट, खारा, खामोश, खरगोष, खारूताई, सुख



                                    व्यंजन अक्षर - ग् - G

      ग् - गमन, हटना, स्थान छोड़ना, पृथक होना, ब्रह्मांड की भ्रमणिय केंद्रीय शक्ती,

      ग् से बननेवाले शब्द - गमयं, गाय, गो, गंध, गंधर्व, गीत, गती, गुरूत्व, गायन,, गिता, गण, गणेश, गज, ग्रह ( लेना, प्रभाव, धारण करना ), गोल, गंभीर, गंगा, गंधार, गज, 

      God, Galaxy, gravity, gum, graphics, Gole, gardan 

      गती - go, gun, Gang, game, gambling, goat 


      घ् - रुकावट, ठहराव, एकाग्रता - 

      घ् से बननेवाले शब्द - घडी, घटीका, घट, घडा, घमेंड, घन, घर, घोर, घोरपड, 


      ड्• 


      जिव्हास्थ  - च वर्ग व्यंजन 

                                        व्यंजन अक्षर - च्

      च् - फिर, पुन:, बाद, दूसरा, अन्य, भिन्न, अपूर्ण, अंगहीन, खण्ड,

      च् से बननेवाले शब्द - चैतन्य, चमक, चत्वार, चार, चतुर, चंचल, चंपक, चल, चाबी, चाची, चटपट, चामट, चिंच, चिमणी, चोच, 


                                         व्यंजन अक्षर - छ्

      छ् - छत्र, छाया, आच्छादन, अखण्ड 

      छ् से बननेवाले शब्द - छत, छाता, छत्ता, छत्री, छाच, छिंक, छूमंतर, छिछि, छम-छम, छंद, छाया, 

                          

                                         व्यंजन अक्षर - ज्

      ज् - जन्म, उत्पन्न, नूतनत्व, गति

      ज् से बननेवाले शब्द - जननी, जन्म, जीव, जगत, जायफळ, जय, जयश्री, जप, जहर जामूनी, जंबू, ज्वार, जुगनु, जैसे, जेथे, जवाहर, जहाज, जामून, 

                                        व्यंजन अक्षर - झ्


      झ् - नाश होना, झरना

      झ से बननेवाले शब्द - झंझट, झगडा, झरना, झारा, झारी, झाडू, झन्कार, झमेला, झिल, झूला, झोका, झोप, झवने, झूल, झबला, 


      य्. - 

                      

                                     तालव्य - ट वर्ग व्यंजन 


                                      व्यंजन अक्षर - ट्


      ट् - मध्यम, साधारण, निर्बल, संकोच, इच्छा विरूध्द 

      ट् से बननेवाले शब्द -कष्ट, काष्ट, रूष्ट, राष्ट्र, भ्रष्ट, टमटम, टनटन, टिन, टमरेल, टूटा, टापू, टिपना, टोकन, टोटका, टोमना, टरटर, टपकना, टीमटीम, टंकार, टाहो, टक्कल, टक्कर, 


                                       व्यंजन अक्षर - ठ्


      ठ् - ठाम, निश्चित, प्रगल्भ, पूर्णता

      ठ् से बननेवाले शब्द - ठसका, ठाकूर, ठेस, ठोकर  ठंडा, ठेका, ठेवा, ठग, ठेंगा, ठाठ, ठेला, ठुमका, ठुमरी, ठोकळ, ठोक, ठोकना, ठहरना, ठहराव, कंठ, पीठ, ठुड्डी, 


                                         व्यंजन अक्षर - ड्


      ड् - क्रिया, प्रकृती, जड, पिंड, अचेतन, 

      ड् से बननेवाले शब्द - डमरू, डोंगर, डर,  क्रिडा, ईडा, पिडा, पिंड, 


                                            व्यंजन अक्षर - ढ्


      ढ् -  निश्चित, निश्चल, धारीत, चेतन, पोलापन, खालीपन

      ढ् से बननेवाले शब्द -आरूढ, रूढी, ढाल, ढोल, ढोलक, ढुलमूल, ढेर, ढेरी, ढेली, ढिला, ढोर, ढ, ढक्कन, ढीट, ढेकर, ढग, 


                                           व्यंजन अक्षर - ण्


      ण् - अभाव 

      ण् से बननेवाले शब्द - प्रणाम, प्रण, प्राण, प्रमाण, कठीण, कोण, कण, कणाद, कणा, टणक, बाण, 


      दंतव्य - त वर्ग व्यंजन 


                                     व्यंजन अक्षर - त्

      त्  - तल, निचे, आधार, इस पार, किनारा, अंतिम स्थान


      त् से बननेवाले शब्द - तल, तरल, तथा, 


                                        व्यंजन अक्षर - थ्


      थ् - ठहरना, ऊपर ठहरना, ऊधर, उस पार

      थ् से बननेवाले शब्द -


                                        व्यंजन अक्षर - द्


      द्  - गति, देना, कम करना, दाह

      द् से बननेवाले शब्द - देह, दिक्षा ( दृष्टी देना ), दान, 


                                        व्यंजन अक्षर - ध्


      ध्  - न देना, धारण करना, रख लेना

      ध् से बननेवाले शब्द -धरणी, ध्रुती, ध्रुव, धैर्य, धनुष्य, धन, 


                                         व्यंजन अक्षर - न् 


      न् - अभाव

      न् से बननेवाले शब्द -       

                   

                                     ओष्ठव्य - प वर्ग व्यंजन 


                                         व्यंजन अक्षर - प्


      प् - रक्षा करना, बंद करना

      प् से बननेवाले शब्द -पितृ, पालन, पोषण, 


                                         व्यंजन अक्षर - फ्


      फ् - फाडना, खोलना, खुला करना

      फ् से बननेवाले शब्द -फुल, प्रफुल्ल, स्फुरण 


                                        व्यंजन अक्षर - ब्


      ब् - बंद, घुसना, समाना, छुपना

      ब् से बननेवाले शब्द - ब्रह्म, ब्रह्मन, ब्राह्मण, बंद, बारा, बहना, बहन, 


                                         व्यंजन अक्षर - भ्


      भ्  - प्रकट, जाहिर, बाहर, प्रकाश  - 

      भ् से बननेवाले शब्द -भारत, 


                                          व्यंजन अक्षर - म्


      म् - अभाव,  मनुष्य, मन, अहम्, मद, स्वकेंद्रित, मुख्य, 

      म् से बननेवाले शब्द -


                                         अंतस्थ: व्यंजन 


                                          व्यंजन अक्षर - य्


      य् - पूर्णगति, जो, भिन्न वस्तु  - यज्ञ

      य् से बननेवाले शब्द -


                                          व्यंजन अक्षर - र्


      र्  - देना, रमण करना, बाहर फेंकना, 

      र् से बननेवाले शब्द -


      व्यंजन अक्षर - ल्


      ल्  - लेना,  अंदर की ओर रमण करना, 

      ल् से बननेवाले शब्द -लेना, लय, लटकार, ललाट, लाल, लंब, लंबित, लोलक, लुट, लिला, लुला, लष्कर, लंपट, लडका, लडकी, लहसून, लू, लंगर, Love, Local, Lorry, London 


                                         व्यंजन अक्षर - व्


      व् - अन्य, पूर्ण भिन्न, अथवा, गति, गंध  - 

      व् से बननेवाले शब्द - वजन, व्यक्त, वन, वह, वाहन, विश्व, विशेष, विमान,

      हवन, भाव, भवन, सर्व


                                           उष्मण: व्यंजन 


                                         व्यंजन अक्षर - स्


      स् - एैसी उर्जा जो सतत है और सर्वत्र है, मंद प्रकाश, सचिदानंद वैश्विक उर्जा, धनात्मक उर्जा, सरस्वती ( ज्ञान ), साथ, तृतीय पुरूष

      स् से बननेवाले शब्द - सत्, सत्य, सत्यम, सत्ता, सब, सबल, सम, समा, समय, समाज, सभा, समर्पण, समन्वय, समाचार, समारंभ, सदा, सदाचार, सन्मान, सप्त, सप्तमी, सात, सरस, सह, सहज, सामान, सानुग्रह, सानिध्य, साथ, संम्पती, संमोहन, संमेलन, संयम,, सिमा, संतुलन, स्नेह, सुयश, संजय, सुशील, सार्थक, सर्प, संपदा, सारक, साक्षी, सायंकाल, संध्या, सवेरा, सर्वत्र, संथ, संगीत, स्वर,, स्वत:, स्वाहा, सेवा, संदेश, संगम, संत, सवारी, स्वार, स्वागत,, साधू, संधी, संघ, संक्षिप्त, संक्षेप, संरक्षण संतुष्ट, संतोष,


                                         व्यंजन अक्षर - श्


      श्  - मध्यम प्रकाश, द्रुष्य ऊर्जा

      श् से बननेवाले शब्द -प्रकाश, आकाश, नाश, 


                                           व्यंजन अक्षर - ष्


      ष्  - ज्ञान ( सब से बडा प्रकाश ), उच्चस्तर चैतन्य उर्जा, ( अद्रुष्य चैतन्य ऊर्जा ) 

      ष् से बननेवाले शब्द -ऋषि,


                                            व्यंजन अक्षर - ह्


      ह् - अन्त, अभाव, संकोच, निषेध

      ह् के विभिन्न अर्थवाले शब्द -

      अन्त - हार, हत्या, हंन्ता, हवन, हवी

      अभाव - हर,

      संकोच - हवन, हवी

      निषेध - हम

      ह् से बननेवाले शब्द - हरी, हारा, हम, हस्त,म्हण, माह, ब्रह्म, ब्रह्मांड, ब्राह्मण, अहं, श्रीहरी, देह 


                                              व्यंजन अक्षर - ळ्


      ळ् - वाणी


      संयुक्त व्यंजन - जोडाक्षर - क्ष, त्र, ज्ञ,  श्र


      क् +ष् = क्ष - बंद ज्ञान, अज्ञान, निर्जीव, नाश, मृत्यु,

      क्ष से बननेवाले शब्द -क्षय, क्षयी, पक्ष, ( नष्टात्मक अर्थ ), 


      त् + र् = त्र - नीचे तक देना, सब देना, कुल, सब, सर्व

      त्र से बननेवाले शब्द -

      ज् + य् = ज्ञ - ज्ञान, अजन्मा, नित्य, कर्म 

      ( ज्ञा = बतलाना )

      ज्ञ से बननेवाले शब्द -

      कर्म - यज्ञ, 

      ज्ञान - ज्ञान, प्रज्ञा


      श् + र् = श्र - प्रभावी, प्रमुख 

      श्र से बननेवाले शब्द -

      श्रम, श्रेष्ठ, श्रीमद्, श्रीमान, जयश्री, 


      जोडाक्षर लिखने का नियम - आधा अक्षर उपर चढता है और पूर्ण अक्षर निचे जुड कर पहले को उपर उठाए रखता है। 


      शब्दशक्ती विज्ञान - शब्द साधना


      पाचन - पाच + अन 

      पाचन क्रिया


      शारदा - श = प्रकाश, र = रमण, गती, दा = दाईनी

      • प्रकाशा कडे गती देणारी


      भग - भ = प्रकट होना, बाहर आना, ग = वैश्विक गत्यात्मक शक्ती

      भाषा - भा = प्रकाश, भाव, षा = प्रकट होना

      भाव - भा= प्रकाश, व = वैश्विक उर्जा ( हमारे अंदर निहित ) ce = हमारे आंदर की इच्छा उर्जा

      भारत - भा = प्रकाश, रत = प्रगती पथ पर,  यानी प्रकाश की ओर प्रगती पथ पर


      ईश्वर - ई = गती, श = प्रकाश, समान, शांत,  व = वजन, र = वाहक, चक्र, रथ, वाहन

               - प्रकाशमान, समान एवं शांतीपूर्ण गती वाला 

      आर्य - आ = चैतन्य शक्ती,  र = वाहक, चक्र,   य = यंत्र, तंत्र

               चैतन्य शक्ती वाहक यंत्र, तंत्र

      सूर्य -  सू = अच्छी उर्जा, र = वाहक, चक्र,   य = यंत्र, तंत्र

               चैतन्य शक्ती वाहक यंत्र, तंत्र


      देव = देनेवाला.  सहदेव - देने वाले के साथ, 

      देव संस्कृती - दान पर आधारीत अर्थव्यवस्था 


      आदान -किसी दूसरे से लेना

      प्रदान - किसी को देना, 


      सचिदानंद -

           सत - अदृष्य सूक्ष्म उर्जा

           चित - चैतन्यमयी उर्जा

           आनंद - आनंद, मौज, मस्ती, मद, मोद युक्त उर्जा  

      सरस्वती - स रस वती = सचिदानंद उर्जा / रसयुक्त

      संस्कार - स- सचिदानंद उर्जा,  न - युक्त, स - सचिदानंद उर्जा (धनात्मक उर्जा), कार - कार्य करणारा 

       = सचिदानंद उर्जायुक्त धनात्मक कार्य करणारा



      व्यवहार - व्यय + हार - व्यय का हरण करना 

      व्यय का हरण होवे इतना मोबदला पाना

      व्यापार - व्यय + पार - व्यय से जादा 

      लाभ कमाने के उद्देश से व्यय से अधिक मोबदला लेना

      व्यायाम - व्यय + आय + म ( मनुष्य शक्ती ) 

      मनुष्य शक्ति का व्यय आय करना


      विशेष टिप्पणी - उपरोक्त सभी जगहोपर प्रथम व्यय करना बताया गया है।



      ॐ = ओ३म

      अ - मूलाधार अग्नि चक्र की (अंदर की )  चैतन्य उर्जा

      उ - ब्रह्माण्डीय ( बाहर की )  चैतन्य उर्जा

      म - सहस्त्रार अग्नि चक्र ( आत्मा ) की चैतन्य उर्जा


      ओं

      ओ - वह ब्रह्मांडिय चैतन्य उर्जा

      म -  आत्मा

      = वह ब्रह्मांडिय चैतन्य उर्जा मै यानी आत्मा हूं ।


      मन - 

      म - आत्मा

      न - नही

      आत्मा नही, शारीरिक संवेदना, इच्छा जनक इंद्रीय 


      मनन - 

      मन - शारीरिक संवेदना जनक इंद्रीय 

      न - नही 

      शारीरिक संवेदना जनक नही, आत्मज विचार करना


      उपवास - 

      उ - ब्रह्माण्डीय ( बाहर की )  चैतन्य उर्जा

      प - प्रकाश 

      वास - रहना 

      = ब्रह्मांडीय चैतन्य उर्जा के शरीर मे स्थित प्रकाश मे रहना।


      उपचार - 

      उ - ब्रह्माण्डीय ( बाहर की )  चैतन्य उर्जा

      प - प्रकाश 

      चार - चलाना

      =  ब्रह्मांडीय चैतन्य उर्जा के शरीर स्थित प्रकाश मे को चलायमान करना ।


      व - वजन

      वा - वायू, हलका, उपर

      वि - विरूध्द, विपरीत

      विशेष - १. शेष के पहले की अवस्था,  २. अभी से पहले की अवस्था, ३. भूतकाल, इतिहास


      कर्म = क - कठीण, प्रश्नार्थक, अनिश्चित, र - रमण,  म - मनुष्य

            = मनुष्य का कठीण कार्य मे रमण करना

      क - कफ ( द्रव उर्जा )

      केला - कफकारक, द्रव उर्जायुक्त


      कस ( सकस )  = क - कठीण, टणक,  स - सचिदानंद उर्जा

      सृष्टी = स - सचिदानंद ,  र - रस,  उ - उर्जा, अष्टी - आठ

             = आठ सचिदानंद रस उर्जायुक्त 

      दृष्टी = द - देह, र - रस,  उ - उर्जा, अष्टी - आठ

             = देह की आठ सचिदानंद रस उर्जायुक्त शक्ती


      ग = विश्व उर्जा ( का केंद्र )

      ण = स्थान दर्शक ? 

      गणपती = विश्व उर्जा के  केंद्र का पती


      गुड - विश्व उर्जा दर्शक शब्द

      गुढ - विश्व उर्जा रहस्य दर्शक शब्द

      गु - विश्व उर्जा  ( मनुष्य की विष्टा )

      गुरू = गु - विश्व उर्जा, रू - रमण कराने की शक्ती

           = विश्व उर्जा का रमण कराने की शक्ती से युक्त व्यक्ती या तत्व

      गर्व = ग - विश्व उर्जा, र - रमण, व - वजन ( शरीर ) 


      साहेब = सहा ऐब असलेला व्यक्ती ( शड रिपू असलेला - काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, मत्सर )

      मक्कार = म - मनुष्य, अ - अहंकार, कार - युक्त ?

                = अहंकारयुक्त मनुष्य, २. तीन म युक्त मनुष्य

      मक्का = तीन म युक्त ठिकाण ?

      मदिना = जहा मद नही ?


      पंच = प - प्रकाश उर्जा,  अन - अन्य, शिवाय,  च - तोच, अन्य नाही

           = प्रत्यक्ष व  प्रमाण प्रकाश उर्जे शिवाय दुसरे काही नाही।

      प्रपंच =



      स - अदृष्य सचिदानंद उर्जा, चैतन्य उर्जा 


      सत् = स - अदृष्य सचिदानंद वैश्विक उर्जा,  त - तळाशी असलेली / आधार असलेली 

           = संपूर्ण विश्वाचा आधार असलेली उर्जा


      श - दृष्यमान सचिदानंद उर्जा, प्रकाश

      शव = श - दृष्यमान सचिदानंद उर्जा, व - वजनदार, गुरूत्वाकर्षण असलेले

      शिव = श - दृष्यमान सचिदानंद उर्जा, ई - प्रवाहीत, व - वजनदार, गुरूत्वाकर्षण असलेले

             = वजनदार दृष्यमान सचिदानंद उर्जा प्रवाहीत असलेले


      शांती = श - दृष्यमान सचिदानंद उर्जा, आ - आकाशिय वैश्विक उर्जा, न - नही, त - तळ, आधार,  ई - प्रवाहीत, चंचल, गतीमान 

              = जहा दृष्यमान सचिदानंद आकाशिय उर्जा चंचल या गतीमान नही,  याने जहा दृष्यमान सचिदानंद आकाशिय उर्जा स्थिर हुई है




      राज्य शक्ती एवं धन शक्ती हासिल करना हमारा प्राथमिक उद्दिष्ट होना चाहिए परंतु इससे भी जादा महत्व पूर्ण यह है की इन शक्तियों का उपयोग करने का हमारा उद्दिष्ट भी बहुत स्पष्ट होना चाहिए। और यह उद्दिष्ट  सर्वे भवन्तु सुखिन: होना चाहिए ।



      हसत खेळत संस्कृत शिका

      खेळा खेळात संस्कृत 

      संस्कृत संभाषण क्रिडा 

      संस्कृत इतर भाषा तुलना क्रिडा


      वचन - ( कर्ता )

                   एक वचन             द्वि वचन               बहु वचन

      कर्ता           अहम्                  युवान्                  युवाम्         

                         मी.              आम्ही दोघे.  आम्ही दोन पेक्षा अधिक 

      कर्म 


      क्रियापद


      विभक्ती -


      एष: - यह. ( पुल्लिंग के लिए )

      एषा - यह. ( स्त्रि लिंग के लिए ) 


      स: - वह ( पुल्लिंग के लिए ) एक वचन

      ते - वे   पुल्लिंग बहुवचन

      सा - वह. ( स्त्री लिंग के लिए )